समय-समय पर आयोजित होने वाली लोक अदालतें (लोगों की अदालतें) हज़ारों मामलों को सुलझाकर अदालतों पर बढ़ते बोझ को कम करने की कोशिश कर रही हैं। इन कोशिशों के बावजूद, जिला अदालत में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस समय ज़िला अदालत में कुल 309,697 मामले लंबित हैं। इनमें से लगभग 70 प्रतिशत मामले एक साल से ज्यादा समय से लंबित हैं।यह आंकड़ा न्यायिक व्यवस्था पर बढ़ते दबाव को दिखाता है। इस तेज़ी से विकसित हो रहे ज़िले में, जैसे-जैसे आबादी और अपराध दर दोनों बढ़ रहे हैं, अदालतों में पहुंचने वाले मामलों की संख्या भी तेज़ी से बढ़ रही है। मामलों के इस बढ़ते बोझ का तेजी से निपटारा करने के लिए, पिछले महीने जिले में 16 नई अदालतें बनाई गईं। औसतन, अदालतों में रोज 500 नए मामले आते हैं।इस समय, अदालतों में 43,940 दीवानी (सिविल) मामले और 265,757 फौजदारी (आपराधिक) मामले लंबित हैं। दीवानी मामलों में से, 30,337 (लगभग 69.04 प्रतिशत) मामले एक साल से ज्यादा समय से लंबित हैं। फौजदारी मामलों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां 186,634 मामले (लगभग 70.23 प्रतिशत) एक साल से ज्यादा पुराने हैं। कुल लंबित मामलों में से, 216,971 मामले एक साल से ज्यादा समय से न्यायिक विचार के अधीन हैं।






