अगर आप भी दिहाड़ी मजदूर हैं और किसी विपत्ति या गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, तो सरकारी योजनाएं आपके लिए बड़ा सहारा बन सकती हैं। इसके लिए जरूरी है कि समय रहते पंजीकरण करवाया जाए, ताकि जरूरत के समय सहायता मिल सके, ऐसा ही एक उदाहरण सुंदरबनी क्षेत्र में सामने आया है।
गांव नोती निवासी दिहाड़ी मजदूर सतपाल की जिंदगी में वर्ष 2016 में उस समय संकट आ गया, जब उसके छोटे बेटे दीप्ति लाल को किडनी की गंभीर बीमारी हो गई। सीमित आय में परिवार का खर्च चलाना ही मुश्किल था, ऐसे में इलाज का भारी खर्च उठाना उसके लिए असंभव सा हो गया।लेबर कार्ड बनवाने से मिली आर्थिक सहायता
हालांकि, वर्ष 2014 में बनवाया गया लेबर कार्ड उसके लिए जीवन रक्षक साबित हुआ। श्रम विभाग राजौरी की “क्रानिक डिजीज असिस्टेंस स्कीम” के तहत उसे समय-समय पर आर्थिक सहायता मिलती रही। वर्ष 2018-19 और 2019-20 में 50-50 हजार रुपये, 2022-23 में 72,482 रुपये और 2023-24 में 67,221 रुपये की मदद दी गई, जबकि 2024-25 की राशि प्रक्रिया में है।
इस सहायता से बेटे का इलाज लगातार जारी रह सका और उसकी स्थिति में सुधार आने लगा। साथ ही बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित नहीं हुई। सतपाल भावुक होकर कहता है कि अगर उसने समय पर लेबर कार्ड नहीं बनवाया होता, तो शायद आज उसका बेटा जिंदा नहीं होता।
असिस्टेंट लेबर कमिश्नर राजौरी प्रद्योत गुप्ता ने बताया कि विभाग हर जरूरतमंद श्रमिक तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। वहीं उप मुख्यमंत्री एवं श्रम मंत्री सुरिंदर चौधरी ने श्रमिकों से अपील की है कि वे पंजीकरण करवाकर योजनाओं का लाभ उठाएं, ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सहायता से वंचित न रहे।







