पेट्रोल-डीजल से लेकर दवाइयों तक की कमी… क्यों महत्वपूर्ण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, दुनिया में क्या पड़ा असर?

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने का असर अब सिर्फ तेल और पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रह गया है। इस रास्ते से दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई होती थी, जो अब रुक गई है। इससे जहां ईंधन के दाम बढ़े हैं, वहीं अब रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतों पर भी असर पड़ने लगा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में आम लोगों को महंगाई का दोहरा झटका लग सकता है। एक तरफ पेट्रोल-डीजल महंगा होगा, तो दूसरी तरफ खाने-पीने और जरूरी सामान की कीमतें भी बढ़ेंगी। दरअसल, ज्यादातर सामान ट्रक, जहाज या विमान से आता है, और ये सभी ईंधन पर चलते हैं। ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर हर चीज की कीमत पर पड़ता है।खाने-पीने की चीजों पर असर

सबसे पहले असर खाने-पीने की चीजों पर देखने को मिल सकता है, खासकर दूध, फल, सब्जियां, मछली और मांस जैसी जल्दी खराब होने वाली चीजों पर। मिडिल ईस्ट यूरिया का बड़ा उत्पादक है, जो खेती में इस्तेमाल होने वाला एक अहम उर्वरक है।

दुनिया का करीब 35% यूरिया और 20% से ज्यादा उर्वरक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरते हैं। इससे किसानों पर असर पड़ सकता है, खासकर खेती के सीजन में, जिससे आगे चलकर खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ सकती हैं।

हीलियम की कमी का असर

दुनिया का एक बड़ा हिस्सा हीलियम का कतर से आता है और यह भी होर्मुज रास्ते से ही सप्लाई होता है। हीलियम का इस्तेमाल सेमीकंडक्टर बनाने और मशीनों को ठंडा रखने में होता है। पहले से ही इसकी कमी चल रही है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक सामान महंगा हो सकता है।

इसके अलावा हीलियम मेडिकल क्षेत्र में भी जरूरी है, जैसे एमआरआई मशीन को ठंडा रखने में। अगर सप्लाई प्रभावित होती है, तो जांच और इलाज की लागत भी बढ़ सकती है।

Khushi Kumari
Author: Khushi Kumari

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