पंजाब में सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देने के दावों के बीच एक चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। लोग अपने घरों, संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सोलर प्लांट लगाकर बिजली तो पैदा कर रहे हैं, लेकिन मौजूदा नीतिगत प्रावधानों के कारण उन्हें इसका पूरा आर्थिक लाभ नहीं मिल पा रहा।
विधानसभा की संबंधित समिति की रिपोर्ट में इस मुद्दे को विस्तार से उठाते हुए इसे उपभोक्ताओं के साथ अन्याय बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में लागू नेट मीटरिंग पालिसी के तहत 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक का वार्षिक चक्र निर्धारित किया गया है। इस अवधि के भीतर यदि कोई उपभोक्ता अपने सोलर प्लांट से उत्पन्न पूरी बिजली का उपयोग नहीं कर पाता, तो बची हुई यूनिट्स वर्ष के अंत में स्वतः शून्य कर दी जाती हैं।यानी उपभोक्ता की ओर से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली बिना किसी मुआवजे के ग्रिड में चली जाती है, जिससे उसे सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।अतिरिक्त बिजली का लाभ नहीं मिल रहा
समिति ने अपने अवलोकन में पाया कि बठिंडा, श्री मुक्तसर साहिब और एसबीएस नगर जैसे जिलों में बड़े स्तर पर सोलर प्रोजेक्ट्स स्थापित किए गए हैं और वहां बिजली उत्पादन भी पर्याप्त मात्रा में हो रहा है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं को उनकी अतिरिक्त बिजली का लाभ नहीं मिल रहा।