हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने अपने बजट भाषण में घोषणा की है कि राज्य के चार विशिष्ट उत्पादों की जीआइ (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) टैगिंग करवाई जाएगी। इस कार्य की जिम्मेदारी पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जलवायु परिवर्तन विभाग को सौंपी गई है। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि चयनित उत्पादों की पहचान, गुणवत्ता और विशिष्टता के आधार पर उनकी जीआइ टैगिंग प्रक्रिया को तेज किया जाए।
इस बार जिन चार उत्पादों को जीआइ टैगिंग के लिए चुना गया है, उनमें चंबा की चुख (पारंपरिक तीखी चटनी), सिरमौरी अदरक, पहाड़ी शहद और भोट जौ (उच्च हिमालयी क्षेत्र का विशेष अनाज) शामिल हैं। ये सभी उत्पाद अपनी गुणवत्ता और पारंपरिक पहचान के लिए पहले से ही प्रसिद्ध हैं, लेकिन जीआइ टैग मिलने के बाद इन्हें एक मजबूत ब्रांड पहचान मिलेगी। सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश के हर जिले के विशेष उत्पाद को पहचान दिलाई जाए, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।इस वर्ष विभाग इस दिशा में तेजी से कार्य करेगा और उम्मीद जताई जा रही है कि चयनित उत्पाद जल्द ही जीआइ टैग हासिल कर लेंगे। हिमाचल के पारंपरिक उत्पाद अब ‘लोकल’ से ‘ग्लोबल’ बनने की राह पर हैं। जीआइ टैगिंग के माध्यम से न केवल इनकी पहचान मजबूत होगी, बल्कि प्रदेश के हजारों लोगों की आजीविका भी नए आयाम छुएगी।







