हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों (CPS) को सरकारी आवासों में रहने की अनुमति नियमित करने के राज्य सरकार के फैसले पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शासन इस सिद्धांत पर नहीं चल सकता कि “आप मुझे चेहरा दिखाइए, मैं आपको नियम दिखाऊंगा।”
मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।
बिना आवेदन विशेष लाभ देने पर सवाल
हाई कोर्ट ने पूछा कि पद से हटाए जाने के बावजूद छह पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों को बिना किसी औपचारिक आवेदन के सरकारी आवास में रहने का विशेष लाभ किस आधार पर दिया गया।
अदालत ने संकेत दिया कि नियमों से हटकर किसी विशेष वर्ग को सुविधा देना उचित नहीं माना जा सकता और इस संबंध में सरकार को स्पष्ट जवाब देना होगा।
पहले ही रद्द हो चुकी थी नियुक्ति
गौरतलब है कि हाई कोर्ट पहले ही पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्तियों को रद्द कर चुका है। इसके बाद कानूनी रूप से वे सरकारी आवासों के पात्र नहीं रह गए थे।
इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा उनके आवासों को नियमित करने के निर्णय को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर हाई कोर्ट सुनवाई कर रहा है।
फिलहाल अदालत ने मामले में सरकार से जवाब तलब किया है और सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।#HimachalHighCourt #HimachalPradesh #CPS #HighCourt #Government #Judiciary #LegalNews #BreakingNews #Politics #IndiaNews