यदि किसी विद्यालय की प्रार्थना सभा में छात्र अखबार पढ़ते हुए सुनाई दें और उसके साथ पांच नए शब्दों का अर्थ भी समझाते नजर आएं, तो यह किसी प्रयोग का नहीं बल्कि शासन की नई पहल का परिणाम होगा। सरकार ने मोबाइल और स्क्रीन में उलझते किशोर मन को सकारात्मक दिशा देने के लिए अखबारों को शिक्षा से जोड़ने का अहम कदम उठाया है।
माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से इस संबंध में शासनादेश जारी किया गया है। आदेश के तहत जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी समेत सभी मंडलीय शिक्षा निदेशकों को निर्देश दिए गए हैं कि स्कूलों में रोजाना अखबार पठन, ग्रुप डिस्कशन और महत्वपूर्ण समाचारों की कटिंग संकलित करना अनिवार्य किया जाए।
शासन का मानना है कि इस पहल से छात्रों में नियमित पढ़ने की आदत विकसित होगी। इससे उन्हें न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लाभ मिलेगा, बल्कि भाषा पर मजबूत पकड़ बनने से वे वाद-विवाद प्रतियोगिताओं और संवाद कौशल में भी दक्ष बन सकेंगे। अखबारों के माध्यम से छात्रों को विज्ञान, संस्कृति, इतिहास और खेल जैसे विषयों की समसामयिक जानकारी भी प्राप्त होगी।
शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बढ़ते स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों की किताबों के प्रति रुचि कम हुई है, साथ ही उनकी एकाग्रता और भावनात्मक विकास पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। ऐसे में स्कूलों के नियमित शैक्षणिक वातावरण में अखबारों को शामिल कर पढ़ने की रुचि को दोबारा प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।
SchoolEducation
NewspaperReading
UPGovernment
EducationReform
ScreenTime
StudentDevelopment
BasicEducation
EducationNews