शिक्षा विभाग ने एक अजीबोगरीब आदेश जारी किया है, जिसके तहत परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक न केवल बच्चों को पढ़ाएंगे, बल्कि स्कूल परिसरों और आसपास की सड़कों में आवारा कुत्तों की निगरानी भी करेंगे।
आदेश जारी होते ही शिक्षकों में हलचल मच गई और शिक्षक संघ ने इसे विरोधाभासी और सम्मानहीन बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। संघ ने आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
आदेश के पालन के लिए शिक्षा निदेशक के निर्देश पर बीएसए ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को सतर्क रहने और इसे लागू कराने के लिए कहा है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा और कुत्तों की देखभाल को एक ही जिम्मेदारी में बांधना उचित नहीं है और इससे शिक्षकों का कार्यभार बढ़ जाएगा।
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