देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शुमार इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से उपजा संकट किसी एक दिन की चूक का परिणाम नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से चली आ रही प्रशासनिक लापरवाही, अवैज्ञानिक निर्माण और कमजोर निगरानी व्यवस्था की भयावह परिणति है। बीते छह दिनों के भीतर 15 लोगों की मौत ने शहर की जल आपूर्ति प्रणाली की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, क्षेत्र में कई सप्ताहों से नलों से गंदा और दुर्गंधयुक्त पानी आ रहा था। इस समस्या को लेकर बार-बार शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन नगर निगम और संबंधित विभागों ने इसे नजरअंदाज किया। हालात तब बेकाबू हो गए, जब 29 दिसंबर 2025 को एक ही दिन में 100 से अधिक लोग उल्टी और दस्त जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ गए।
स्थिति बिगड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन हरकत में आया, लेकिन तब तक कई परिवार अपूरणीय क्षति झेल चुके थे। यह मामला न केवल इंदौर की स्वच्छता छवि पर सवाल खड़े करता है, बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे, जल आपूर्ति प्रणाली और जवाबदेही तंत्र की भी पोल खोलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते चेतावनियों को गंभीरता से लिया जाता, तो इस त्रासदी को रोका जा सकता था।IndoreWaterCrisis
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