भारतीय सेना अपनी हथियार प्रणालियों के संचालन के लिए गोला-बारूद और सटीक गोला-बारूद (Precision Ammunition) के लगभग 200 विभिन्न वेरिएंट का उपयोग करती है। केंद्र सरकार की लक्षित नीति सुधारों और रक्षा उद्योग के साथ मजबूत साझेदारी के परिणामस्वरूप इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक गोला-बारूद का स्वदेशीकरण किया जा चुका है, जिसे अब घरेलू स्रोतों से ही प्राप्त किया जा रहा है। इस पहल से सेना की दीर्घकालिक युद्ध क्षमता और रणनीतिक तैयारी को उल्लेखनीय मजबूती मिली है।
अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि गोला-बारूद, अतिरिक्त कलपुर्जे और लॉजिस्टिक्स किसी भी सैन्य अभियान की रीढ़ होते हैं। इसी रणनीतिक आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना ने गोला-बारूद उत्पादन में आत्मनिर्भरता को अपनी समग्र सैन्य तैयारी की नीति के केंद्र में रखा है।
एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के अनुसार, आयात पर निर्भरता घटाने और एक मजबूत व लचीली घरेलू आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के उद्देश्य से किए गए स्वदेशीकरण प्रयास अब ठोस परिणाम दे रहे हैं। इन पहलों ने न केवल गोला-बारूद की उपलब्धता सुनिश्चित की है, बल्कि सेना की दीर्घकालिक युद्धक क्षमता और परिचालन आत्मविश्वास को भी नया आकार दिया है।IndianArmy
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