झारखंड में हाथियों और इंसानों के बीच बढ़ता टकराव लगातार गंभीर और भयावह रूप लेता जा रहा है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) की ताजा सर्वे रिपोर्ट में ऐसे चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं, जो राज्य में मानव-हाथी संघर्ष की भयावहता को उजागर करते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2000 से 2025 के बीच झारखंड में कुल 256 हाथियों की मौत दर्ज की गई है। इनमें से 172 हाथियों की जान करंट लगने, जहर दिए जाने, विस्फोटक सामग्री और ट्रेन की चपेट में आने जैसी मानवीय गतिविधियों के कारण गई। वहीं 84 हाथियों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई।
इसी अवधि में हाथियों के हमलों में 1400 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 600 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि झारखंड में मानव-हाथी संघर्ष अब केवल वन्यजीव संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि एक बड़ी सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौती बन चुका है।
चाईबासा में एक ही दिन में तीन मौतें, गांवों में दहशत
हाथियों के उग्र व्यवहार का ताजा उदाहरण शुक्रवार को पश्चिम सिंहभूम जिले के चाईबासा में देखने को मिला। यहां अलग-अलग इलाकों में हाथियों के हमलों में तीन लोगों की मौत हो गई। एक ही दिन में हुई इन घटनाओं से आसपास के गांवों में भय का माहौल है और ग्रामीणों में भारी दहशत देखी जा रही है।
वन विभाग और प्रशासन की ओर से सतर्कता बढ़ाने और प्रभावित इलाकों में निगरानी तेज करने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही मौतें इस समस्या की गंभीरता को और गहरा कर रही हैं।Jharkhand
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