चकरनगर क्षेत्र के कई गांवों और आसपास के खेतों में करीब एक हजार आवारा गोवंशी खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे किसानों की मेहनत पर लगातार पानी फिर रहा है। ये गोवंशी कुछ ही मिनटों में खेतों में खड़ी हरी-भरी फसलों को नष्ट कर देते हैं, जिससे किसान भारी नुकसान झेलने को मजबूर हैं।
स्थानीय किसानों का आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते क्षेत्र की गोशालाएं खाली पड़ी हैं, जबकि गोवंश सड़कों और खेतों में घूमने को विवश हैं। यदि समय रहते इन गोवंशों को गोशालाओं में संरक्षित किया जाता, तो किसानों को इस भयावह स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
गोवंश के बढ़ते आतंक के कारण अब तक एक हजार एकड़ से अधिक कृषि भूमि की फसल पूरी तरह उजड़ चुकी है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति चरमरा गई है और कई परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। खेती पर निर्भर इस इलाके में आजीविका का संकट गहराता जा रहा है।
किसानों का कहना है कि यह क्षेत्र पहले से ही पिछड़ा पारपट्टी इलाका है, जहां सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाती हैं। शासन स्तर से जारी आदेशों का केवल औपचारिक पालन किया जाता है, जबकि जमीनी स्तर पर उन्हें लागू करने में गंभीरता नहीं दिखाई जाती।
यदि जल्द ही आवारा गोवंश की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में किसानों का नुकसान और बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।