सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार और विभागीय उदासीनता का सीधा असर जम्मू-कश्मीर के आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ता नजर आ रहा है। प्रदेश में हर वर्ष जलजनित बीमारियों के औसतन एक लाख से अधिक मामले सामने आ रहे हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के अस्पतालों में पीलिया, डायरिया, हेपेटाइटिस, पेचिश और टाइफाइड जैसी जलजनित बीमारियों के मरीज बड़ी संख्या में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें जम्मू, श्रीनगर और शोपियां जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। कुल मामलों में से लगभग आधे मरीज इन्हीं तीन जिलों से सामने आते हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2023 में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में जलजनित रोगों के कुल 1,02,236 मामले दर्ज किए गए। इनमें डायरिया के सबसे अधिक 57,184 मामले सामने आए। इसके अलावा टाइफाइड के 26,329, हेपेटाइटिस के 7,904, पेचिश के 9,391 और पीलिया के 1,428 मामले दर्ज किए गए।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता, जलापूर्ति व्यवस्था की निगरानी और स्वच्छता योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी के कारण ये बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।#JammuKashmir #WaterBorneDiseases #PublicHealth #Diarrhea #Typhoid #HealthcareCrisis #HealthNews