साढ़े 52 लाख रुपये का भुगतान करने के बावजूद थ्री बीएचके फ्लैट का कब्जा न दिए जाने का मामला अब बिल्डर पर भारी पड़ गया है। नैनीताल निवासी अनविता त्रिपाठी पिछले सात वर्षों से अपने फ्लैट के कब्जे के लिए भटक रही थीं, लेकिन देहरादून स्थित श्री आरना एसोसिएट्स परियोजना से जुड़े प्रमोटर उन्हें लगातार टालते रहे।
मामला उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी (रेरा) तक पहुंचने के बाद अब घर खरीदार के पक्ष में बड़ा और सख्त फैसला सामने आया है। रेरा ने प्रमोटरों के रवैये को गंभीर मानते हुए न केवल कड़ी फटकार लगाई, बल्कि स्पष्ट आदेश दिया है कि शिकायतकर्ता अनविता त्रिपाठी को फ्लैट संख्या-601 का विधिवत कब्जा 15 दिनों के भीतर सौंपा जाए।
रेरा ने अपने आदेश में यह भी संकेत दिया कि लंबे समय तक खरीदार को उसके अधिकार से वंचित रखना नियमों का उल्लंघन है और इस तरह की लापरवाही को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्राधिकरण का यह फैसला उन घर खरीदारों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है, जो वर्षों से बिल्डरों की मनमानी का सामना कर रहे हैं।
इस आदेश के बाद श्री आरना एसोसिएट्स परियोजना से जुड़े प्रमोटरों पर कानूनी दबाव बढ़ गया है और समयसीमा के भीतर आदेश का पालन न करने की स्थिति में आगे सख्त कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है।
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