प्रखंड क्षेत्र में यूरिया खाद की खुलेआम कालाबाजारी से किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। सरकारी मूल्य 266 रुपये प्रति बोरा तय होने के बावजूद, बाजार में किसानों से 360 से 450 रुपये प्रति बोरा तक वसूली की जा रही है।
खरीफ फसलों जैसे धान और मक्का के दौरान यह अवैध वसूली शुरू हुई थी, लेकिन रबी फसल के मौसम में स्थिति और गंभीर हो गई है।
चांदन बाजार में छह से सात दुकानों को सरकारी यूरिया खाद बेचने की अनुमति दी गई है। बावजूद इसके, लगभग सभी दुकानों पर निर्धारित मूल्य की खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
गोविंदपुर निवासी किसान राजेश यादव ने बताया कि गेहूं, चना, सरसों, आलू और प्याज जैसी रबी फसलों के लिए जब किसान खाद लेने जाते हैं, तो उन्हें मजबूरी में मनमाने दाम चुकाने पड़ते हैं। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति और खेती की लागत में बढ़ोतरी हो रही है।
किसानों का कहना है कि सरकार को जल्द से जल्द निगरानी और कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि निर्धारित दर पर यूरिया उपलब्ध कराया जा सके।
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