पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) को बड़ा झटका देते हुए असिस्टेंट मैनेजर (आईटी सिस्टम्स) शिवानी जैन की याचिका स्वीकार कर ली है। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने अपने फैसले में 27 अक्टूबर 2025 को पारित उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें शिवानी जैन की इस्तीफा वापसी और पुनर्नियुक्ति की मांग खारिज कर दी गई थी।
मामला क्या है?
- शिवानी जैन को 15 मार्च 2024 को पीएसपीसीएल में असिस्टेंट मैनेजर (आईटी सिस्टम्स) नियुक्त किया गया था।
- इससे पहले वह सहायक प्रोफेसर (कंप्यूटर साइंस) पद की चयन प्रक्रिया में शामिल हुई थीं और 2 दिसंबर 2021 को चयनित भी हो गई थीं।
- लंबित याचिका के कारण उनकी नियुक्ति रुकी रही, लेकिन 23 सितंबर 2024 को उन्हें सरकारी कॉलेज रोशनवाला (भावनीगढ़), जिला संगरूर में तैनाती मिली।
- नई नियुक्ति मिलने पर उन्होंने 1 अक्टूबर 2024 को पीएसपीसीएल से इस्तीफा दे दिया, जिसे 24 दिसंबर 2024 को स्वीकार कर लिया गया।
- 14 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने सहायक प्रोफेसर की पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी, जिससे उनकी नई नियुक्ति भी समाप्त हो गई।
- इसके बाद उन्होंने 22 जुलाई 2025 को पीएसपीसीएल में दोबारा ज्वाइन करने के लिए आवेदन किया, जिसे 27 अक्टूबर 2025 को खारिज कर दिया गया।
हाईकोर्ट का तर्क
अदालत ने कहा कि शिवानी जैन दोनों ही सेवाओं के दौरान प्रोबेशन पर थीं और उन्हें कहीं भी स्थायी रूप से पुष्टि नहीं मिली थी। ऐसे में उनका लियन (मूल पद पर स्थायी अधिकार) पीएसपीसीएल के पद पर बना रहा और इसे समाप्त नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि लियन तभी समाप्त होता है जब कोई कर्मचारी किसी अन्य पद पर स्थायी रूप से नियुक्त हो जाए। चूंकि शिवानी जैन नई नियुक्ति पर भी प्रोबेशनर ही थीं, इसलिए उनका लियन पीएसपीसीएल के पद पर बना रहा।
आदेश
हाईकोर्ट ने 27 अक्टूबर 2025 का आदेश रद्द करते हुए पीएसपीसीएल को निर्देश दिया कि वह तीन महीनों के भीतर शिवानी जैन के दावे पर विचार कर एक कारणयुक्त आदेश पारित करे और उसे सूचित करे।
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