चंडीगढ़ के परिधीय क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियां लगातार तेज़ी से जारी हैं, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। आरोप है कि संबंधित अधिकारी स्थिति से अवगत होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे, जिससे नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। इस पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों से जवाब मांगा है।
यह मामला काउंसिल ऑफ इंजीनियर्स एवं अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा है, जिन पर एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ सुनवाई कर रही है।
सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों में से एक पक्ष की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा गया। साथ ही अधिकरण को यह आश्वासन भी दिया गया कि 18 दिसंबर को हुई पिछली सुनवाई के दौरान दर्ज कराए गए बयानों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
एनजीटी ने प्रतिवादी की इस मांग को स्वीकार करते हुए अतिरिक्त समय प्रदान कर दिया है। अधिकरण ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी को लेकर आगे किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और मामले की निगरानी सख्ती से की जाएगी।