जिले की तीन महत्वपूर्ण सड़कों पर स्थित भूस्खलन और भू-धंसाव प्रभावित क्रोनिक स्लाइड जोन के उपचार (ट्रीटमेंट) के लिए करीब 100 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई गई है। इन क्षेत्रों में कार्य शुरू करने को लेकर प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, संबंधित क्षेत्रों में घना जंगल होने के आधार पर वन विभाग ने पहले वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इसके बाद लोक निर्माण विभाग (PWD/लोनिवि) के अनुरोध पर जिलाधिकारी ने आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए एक समिति का गठन किया है। साथ ही संबंधित स्थानों का स्थलीय निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद इन खतरनाक स्लाइडिंग जोन के ट्रीटमेंट का रास्ता साफ हो जाएगा और आवश्यक कार्य शुरू किया जा सकेगा।
दरअसल जिले में काठगोदाम-हैड़ाखान मार्ग और सिमलिया बैंड राज्य मार्ग के किलोमीटर तीन क्षेत्र में करीब 280 मीटर का हिस्सा लगातार भूस्खलन और भू-धंसाव के कारण बेहद संवेदनशील और डेंजर जोन बन चुका है। इस क्षेत्र में लगातार जमीन खिसकने से सड़क की स्थिरता पर खतरा बना हुआ है।
इस मार्ग की स्थिति खराब होने से भीमताल, ओखलकांडा और चंपावत क्षेत्र के करीब 200 गांवों की आबादी प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों और यात्रियों को लगातार खतरे का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर बरसात के मौसम में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ने से सड़क मार्ग अक्सर बंद हो जाता है।
सड़क बंद होने की स्थिति में चिकित्सा सेवाएं, आपातकालीन सेवाएं, खाद्य आपूर्ति और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रभावित हो जाती हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में स्लाइडिंग जोन ट्रीटमेंट, रिटेनिंग वॉल निर्माण, ड्रेनेज सिस्टम और पहाड़ी स्थिरीकरण जैसे कार्य समय पर करना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में बड़े हादसों से बचा जा सके।
प्रशासन का कहना है कि इस परियोजना को आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से प्राथमिकता दी जा रही है और रिपोर्ट मिलने के बाद जल्द कार्य शुरू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।#LandslideNews #HillRoadSafety #DisasterManagement #RoadProject #UttarakhandNews #InfrastructureNews #PublicSafety