उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में बुनियादी शिक्षा प्रणाली को रटंत पद्धति से हटाकर प्रयोगधर्मी और कौशल-आधारित बनाने की दिशा में सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में चयनित स्कूलों और प्रशिक्षण संस्थानों में ‘Learning by Doing’ (सीखो करके) मॉडल को प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है, जिससे बच्चों की समझ, विश्लेषण क्षमता और व्यावहारिक ज्ञान को मजबूत किया जा सके।
जानकारी के अनुसार प्रदेश के 3288 चयनित परिषदीय विद्यालयों और डायट (DIET) संस्थानों में इस मॉडल को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय प्रयोग, गतिविधियों और वास्तविक जीवन के अनुभवों के माध्यम से सीखने के लिए प्रेरित करना है। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस मॉडल से बच्चों में तार्किक सोच, समस्या समाधान क्षमता और रचनात्मकता का विकास होगा।
इस योजना को मजबूत आधार देने के लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में उद्यमिता विकास संस्थान, लखनऊ में 16 फरवरी से 18 मार्च के बीच विज्ञान और गणित विषय के 1400 शिक्षकों के लिए त्रिदिवसीय आवासीय कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कुल 66 बैचों में पूरा किया जाएगा, ताकि प्रत्येक शिक्षक को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मिल सके।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार इससे पहले 1880 शिक्षकों को इस मॉडल के तहत प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षित शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को प्रोजेक्ट वर्क, प्रयोग, मॉडल निर्माण और गतिविधि आधारित शिक्षण के माध्यम से पढ़ाएंगे। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई में रुचि बढ़ने के साथ-साथ उनकी समझ भी बेहतर होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि कौशल आधारित शिक्षा मॉडल आने वाले समय में रोजगार उन्मुख शिक्षा को बढ़ावा देने में भी अहम भूमिका निभाएगा। इससे छात्र केवल परीक्षा तक सीमित न रहकर व्यावहारिक जीवन में भी अपनी क्षमता का उपयोग कर सकेंगे।
शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि भविष्य में इस मॉडल को और अधिक विद्यालयों में लागू किया जाए, जिससे प्रदेश के अधिक से अधिक छात्र आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़ सकें।#UPEducation #LearningByDoing #SkillBasedEducation #TeacherTraining #BasicEducation #UPSchools #EducationReform