नई दिल्ली: फरवरी महीने में खगोल विज्ञान के शौकीनों के लिए एक बेहद खास खगोलीय घटना होने जा रही है। 17 फरवरी 2026 को आकाश में एनुलर सोलर एक्लिप्स (Annular Solar Eclipse) यानी ‘रिंग ऑफ फायर’ सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। यह दुर्लभ खगोलीय घटना दुनिया के चुनिंदा हिस्सों में ही देखी जा सकेगी।
एनुलर सोलर एक्लिप्स उस समय होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, लेकिन अपनी कक्षा में पृथ्वी से अपेक्षाकृत अधिक दूरी पर होने के कारण वह सूर्य को पूरी तरह से ढक नहीं पाता। परिणामस्वरूप सूर्य का बाहरी किनारा चमकता हुआ दिखाई देता है, जो आग के चमकीले छल्ले जैसा प्रतीत होता है। इसी कारण इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है।
खगोलीय दृष्टि से यह घटना अत्यंत आकर्षक मानी जाती है। जब चंद्रमा सूर्य के केंद्र को ढक लेता है और चारों ओर प्रकाश का गोलाकार घेरा बनता है, तो दृश्य ऐसा लगता है मानो किसी अग्नि-वलय के बीच काला गोला स्थापित हो।
अंतरिक्ष एजेंसी NASA के अनुसार, यह सूर्य ग्रहण वैश्विक स्तर पर दिखाई नहीं देगा। इसका दृश्य क्षेत्र सीमित रहेगा और केवल कुछ विशेष भौगोलिक क्षेत्रों में ही इसे प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकेगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए देश के खगोल प्रेमियों को इसका सीधा अवलोकन करने का अवसर नहीं मिलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखना सुरक्षित नहीं होता। जहां यह ग्रहण दिखाई देगा, वहां भी इसे देखने के लिए विशेष सोलर फिल्टर या प्रमाणित सोलर व्यूइंग ग्लास का उपयोग करना आवश्यक होगा।
फरवरी का यह ‘रिंग ऑफ फायर’ खगोलीय कैलेंडर की महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल है और वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी रोमांच का विषय बना हुआ है।