देश में हर वर्ष होने वाली कुल मौतों में से केवल लगभग 20 प्रतिशत मामलों में ही मृत्यु के कारणों से संबंधित क्लीनिकल जानकारी उपलब्ध हो पाती है। शेष 80 प्रतिशत मामलों में मौत के वास्तविक कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं हो पाते।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति के लिए गंभीर चुनौती है। मृत्यु के सटीक कारणों का अभाव न केवल स्वास्थ्य योजनाओं की प्रभावशीलता को प्रभावित करता है, बल्कि संसाधनों के उचित आवंटन में भी बाधा बनता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक मृत्यु के कारणों का विश्वसनीय और व्यापक डेटा उपलब्ध नहीं होगा, तब तक बीमारियों के पैटर्न, महामारी के रुझान और क्षेत्रीय स्वास्थ्य समस्याओं का सही आकलन संभव नहीं है।
इस सूचना अभाव को दूर करने के लिए ‘वर्बल ऑटोप्सी’ जैसी प्रणाली को व्यापक स्तर पर लागू करने की आवश्यकता बताई जा रही है। वर्बल ऑटोप्सी में प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा मृतक के परिजनों से बातचीत कर लक्षणों और परिस्थितियों के आधार पर संभावित मृत्यु कारण का आकलन किया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस व्यवस्था को ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो मृत्यु संबंधी आंकड़ों की गुणवत्ता में सुधार होगा और स्वास्थ्य नीति निर्माण अधिक सटीक एवं परिणाममुखी बन सकेगा।
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