वर्ष 2018 के बहुचर्चित AK-47 बरामदगी मामले में जिला अदालत के निर्णय के विरुद्ध पुलिस ने अब उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। मुफस्सिल थाना कांड से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रवाल दत्ता की अदालत ने 19 दिसंबर 2025 को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में सभी 10 आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया था।
अदालत के इस फैसले के बाद पुलिस की जांच प्रक्रिया और अनुसंधान की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए। कानूनी विशेषज्ञों और स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर व्यापक चर्चा हुई तथा जांच में कथित खामियों को लेकर आलोचना भी सामने आई।
पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद ने बताया कि न्यायालय के विस्तृत आदेश का विधिवत परीक्षण करने के उपरांत सभी दसों आरोपितों की रिहाई को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता और सुरक्षा आयामों को ध्यान में रखते हुए विधिसम्मत कदम उठाए जा रहे हैं।
एसपी ने कहा कि अपील दायर करते समय अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों, केस डायरी और न्यायालय की टिप्पणियों का गहन विश्लेषण किया गया है। उच्च न्यायालय में मामले को मजबूत कानूनी आधार पर प्रस्तुत करने की रणनीति तैयार की जा रही है, ताकि न्यायिक समीक्षा के दौरान सभी तथ्यों को प्रभावी ढंग से रखा जा सके।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में AK-47 जैसे प्रतिबंधित और घातक हथियार की बरामदगी ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी थी। इसे कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला माना गया था। इसी कारण यह केस प्रारंभ से ही चर्चा में रहा।
जिला अदालत द्वारा सभी आरोपितों को बरी किए जाने के बाद यह प्रश्न उठने लगे थे कि क्या जांच एजेंसी पर्याप्त और ठोस साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने में सफल रही। अब उच्च न्यायालय में दायर अपील के बाद यह मामला एक बार फिर कानूनी और सार्वजनिक विमर्श का केंद्र बन गया है।
आने वाले दिनों में उच्च न्यायालय की सुनवाई इस मामले की दिशा तय करेगी। फिलहाल, पुलिस का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया के तहत उपलब्ध सभी विकल्पों का उपयोग करते हुए प्रकरण को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा।
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