संसद के बजट सत्र के पहले चरण में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक ने सदन की कार्यवाही को बार-बार बाधित किया। विपक्ष के विरोध, आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक रणनीतियों के बीच सदन का वातावरण लगातार तनावपूर्ण बना रहा।
प्रधानमंत्री का मौन और विपक्ष की आपत्ति
विपक्षी महिला सांसदों द्वारा हमले की आशंका जताए जाने और सदन के भीतर बढ़ते हंगामे के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi का इस मुद्दे पर प्रत्यक्ष रूप से प्रतिक्रिया न देना विपक्ष के निशाने पर रहा। विपक्ष ने इसे संवेदनशील मुद्दों पर चुप्पी करार दिया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे अनावश्यक राजनीतिकरण बताया।
लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव
स्थिति तब और गरमा गई जब विपक्ष ने Om Birla के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की पहल की। विपक्ष का आरोप था कि सदन की कार्यवाही निष्पक्ष रूप से संचालित नहीं हो रही है। सत्ता पक्ष ने इसे संसदीय परंपराओं के खिलाफ कदम बताया।
राहुल गांधी की सदस्यता को लेकर प्रस्ताव
इसी बीच Rahul Gandhi की सदस्यता समाप्त करने से जुड़ा प्रस्ताव भी चर्चा का केंद्र बना। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और सदन में कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा से बढ़ा विवाद
सामान्य रूप से बजट पेश होने के बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा एक औपचारिक संसदीय प्रक्रिया मानी जाती है। किंतु इस बार चर्चा के दौरान आरोप-प्रत्यारोप व्यक्तिगत टिप्पणियों तक पहुंच गए। राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक मतभेद तीखी बयानबाजी में बदल गए।
2014 की याद
गौरतलब है कि वर्ष 2014 में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष रहीं Sushma Swaraj ने सदन में कहा था—“हम विरोधी हैं, दुश्मन नहीं।” वर्तमान परिदृश्य में यह टिप्पणी फिर प्रासंगिक होती दिख रही है, क्योंकि संसदीय बहस का स्तर और आपसी कटुता पर सवाल उठ रहे हैं।#BudgetSession #Parliament #OppositionVsGovernment #LokSabha #RahulGandhi #IndianPolitics