हिमाचल प्रदेश में चिट्टा (हेरोइन) के बढ़ते प्रचलन पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार अब राजनीतिक स्तर पर सख्त कदम उठाने जा रही है। सरकार आगामी विधानसभा बजट सत्र में एक संशोधन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत चिट्टा तस्करी या उससे जुड़े मामलों में संलिप्त पाए गए व्यक्तियों को स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने का प्रावधान किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य नशा तस्करी में शामिल लोगों को सार्वजनिक जीवन से दूर रखना है, ताकि जनप्रतिनिधित्व की गरिमा बनी रहे और समाज में गलत संदेश न जाए। सरकार का मानना है कि यदि ऐसे व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से रोका जाता है तो यह नशे के खिलाफ एक मजबूत सामाजिक और राजनीतिक संदेश होगा।
उल्लेखनीय है कि Supreme Court of India ने 31 मई से पहले राज्य में स्थानीय निकाय चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए हैं। इसी समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए सरकार चुनाव प्रक्रिया से पूर्व यह कानूनी प्रावधान लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि संशोधन विधेयक को मंत्रिमंडल की औपचारिक स्वीकृति मिलने के बाद विधानसभा के बजट सत्र में पेश किया जाएगा। विधेयक पारित होने पर स्थानीय निकाय चुनावों के लिए पात्रता संबंधी नियमों में बदलाव किया जाएगा, जिसमें चिट्टा तस्करी से जुड़े मामलों को भी अयोग्यता के दायरे में शामिल किया जाएगा।
राज्य में पिछले कुछ वर्षों से चिट्टा तस्करी एक गंभीर सामाजिक समस्या के रूप में उभरी है। सरकार पहले से ही कानून-व्यवस्था के स्तर पर कड़ी कार्रवाई कर रही है, लेकिन अब इसे राजनीतिक जवाबदेही से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह कदम पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम जैसे निकायों के चुनावों में स्वच्छ छवि वाले उम्मीदवारों को बढ़ावा देने की दिशा में अहम साबित हो सकता है।
विपक्ष की ओर से इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाया जाएगा, यह बजट सत्र के दौरान स्पष्ट होगा। हालांकि सरकार का संकेत है कि नशे के खिलाफ सख्त रुख अपनाने में किसी प्रकार की ढील नहीं बरती जाएगी।
यदि विधेयक पारित होता है, तो यह हिमाचल प्रदेश में नशे के विरुद्ध अभियान को एक नया आयाम देगा और राजनीतिक व्यवस्था में पारदर्शिता व नैतिकता#HimachalPradesh #Chitta #DrugFreeHimachal #LocalBodyElection #BudgetSession #PoliticalReform #BreakingNews