झारखंड में आयोजित नगर निकाय चुनाव 2026 के दौरान एक बड़ा प्रशासनिक मुद्दा सामने आया है। चुनाव ड्यूटी में तैनात हजारों कर्मी इस बार अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सके, क्योंकि उनके लिए पोस्टल बैलेट की व्यवस्था नहीं की गई थी।
आमतौर पर चुनाव ड्यूटी में लगे कर्मियों को मतदान से पहले ही पोस्टल बैलेट के माध्यम से वोट डालने की सुविधा दी जाती है, ताकि वे अपने अधिकार का उपयोग कर सकें। लेकिन इस बार निकाय चुनाव में ऐसी कोई व्यवस्था लागू नहीं की गई, जिसके चलते बड़ी संख्या में कर्मचारी मतदान से वंचित रह गए।
स्थिति और जटिल तब हो गई जब इन कर्मियों की ड्यूटी उनके मूल निर्वाचन क्षेत्र से अलग जगहों पर लगाई गई। ऐसे में वे न तो अपने गृह क्षेत्र में वोट डाल सके और न ही ड्यूटी स्थल पर मतदान कर पाए।
इस पूरे मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने गंभीर आपत्ति जताई है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि यह हजारों मतदाताओं के अधिकारों का सीधा हनन है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग से संपर्क भी किया गया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
चुनाव से जुड़े प्रमुख बिंदुओं पर नजर डालें तो राज्य के 48 नगर निकायों—जिनमें 9 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायत शामिल हैं—में 23 फरवरी 2026 को एक ही चरण में मतदान कराया गया। मतदान पूरी तरह बैलेट पेपर के माध्यम से हुआ और इस चुनाव में NOTA का विकल्प भी उपलब्ध नहीं था।
ध्यान देने वाली बात यह है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में जहां पोस्टल बैलेट और ETPB (Electronically Transmitted Postal Ballot) जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहती हैं, वहीं इस निकाय चुनाव में इन्हें लागू नहीं किया गया।
अनुमान है कि राज्यभर में करीब 20,000 से 50,000 तक मतदान कर्मी ड्यूटी पर तैनात थे, जो इस व्यवस्था के अभाव में अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं कर सके। यह मामला अब चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और कर्मियों के अधिकारों को लेकर गंभीर बहस का विषय बनता जा रहा है।#JharkhandElection #NikayChunav2026 #PostalBallot #VotingRights #ElectionNews #BJPJharkhand