राजस्थान के पुष्कर में आयोजित हनुमंत कथा के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिसने धार्मिक और सामाजिक हलकों में बहस को जन्म दे दिया है। अपने संबोधन में उन्होंने अजमेर में हिंदुओं द्वारा चादर चढ़ाने की परंपरा पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह उन्हें स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि अजमेर जिले के पुष्कर में एक भव्य मठ का निर्माण हो, जिससे हिंदू समाज के लोग वहां अधिक संख्या में आएं और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ें। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक पहचान और आस्था से जुड़े मुद्दों पर लगातार चर्चा हो रही है।
सनातन पहचान पर जोर
अपने प्रवचन के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भारत में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति मूल रूप से सनातनी है। उन्होंने इसे सांस्कृतिक और पारंपरिक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए समझाया कि भारतीय समाज की जड़ें सनातन परंपरा में गहराई से जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने इस संदर्भ में Amar Akbar Anthony फिल्म का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि इस फिल्म के अंत में यह सामने आता है कि तीनों अलग-अलग धर्मों में पले-बढ़े भाइयों के पिता एक ही हैं, जो भारतीय संस्कृति की एकता और समानता को दर्शाता है।
अन्य धर्मों पर भी टिप्पणी
अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनका जन्म किसी अन्य मजहब में हुआ होता, तो संभवतः वे बिना किसी मूर्ति या चित्र के पूजा कर रहे होते। इसके विपरीत उन्होंने सनातन धर्म को श्रेष्ठ बताते हुए कहा कि इसमें देवी-देवताओं के साथ-साथ महिलाओं को भी पूजनीय माना जाता है।
प्रधानमंत्री के कार्यों की सराहना
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि देश में जो बदलाव पिछले कुछ वर्षों में देखने को मिले हैं, वह अभूतपूर्व हैं।
उन्होंने विशेष रूप से राम मंदिर अयोध्या के निर्माण और केदारनाथ मंदिर के पुनर्विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि ये ऐतिहासिक पहल हैं, जिन्हें लंबे समय तक याद रखा जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं, लेकिन अच्छे कार्यों की सराहना करना जरूरी है।
पहले भी दे चुके हैं विवादित बयान
यह पहली बार नहीं है जब धीरेंद्र शास्त्री अपने बयानों को लेकर चर्चा में आए हैं। इससे पहले भी उन्होंने हिंदू समाज को लेकर कई ऐसे बयान दिए हैं, जिन पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।
हाल ही में उन्होंने यह कहा था कि हिंदुओं को कम से कम चार बच्चे पैदा करने चाहिए, ताकि समाज में संतुलन बना रहे। इस बयान को लेकर राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों के बीच तीखी बहस देखने को मिली थी।
संभावित सामाजिक और राजनीतिक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान धार्मिक और सामाजिक विमर्श को प्रभावित कर सकते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहां अलग-अलग समुदायों की धार्मिक मान्यताएं जुड़ी होती हैं। अजमेर और पुष्कर दोनों ही धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल हैं, जहां विभिन्न आस्थाओं के लोग आते हैं।
ऐसे में इस तरह की टिप्पणियों से सामाजिक सौहार्द पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। आने वाले दिनों में इस बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं, जिससे यह मुद्दा और गरमा सकता है।#DhirendraShastri #Pushkar #Ajmer #SanatanDharma #BageshwarDham #NarendraModi #RamMandir #Kedarnath #IndiaNews #ReligiousDebate