मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे सर्वे में महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अपनी जांच में परिसर से कुल 94 मूर्तियां, मूर्तिखंड और अलंकरणयुक्त स्थापत्य अवयवों की पहचान की है।
एएसआई की रिपोर्ट के अनुसार, इन कलाकृतियों में बेसाल्ट, संगमरमर, शिस्ट, सॉफ्ट स्टोन, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर जैसे विभिन्न पत्थरों का उपयोग किया गया है। यह विविधता उस समय की उन्नत शिल्पकला और स्थापत्य परंपरा को दर्शाती है।
सर्वे के दौरान संरचना में प्रयुक्त स्तंभों और खिड़कियों पर बारीक नक्काशी भी सामने आई है। इनमें भगवान गणेश, नरसिंह और भैरव सहित विभिन्न देवी-देवताओं की आकृतियां उकेरी गई हैं। इसके अलावा मानव और पशु रूपों की कलात्मक प्रस्तुति भी देखने को मिली है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन मूर्तियों और अवयवों में से अधिकांश परमार काल से संबंधित हैं, जो उस दौर की सांस्कृतिक और धार्मिक समृद्धि को दर्शाते हैं।
मामले में मंदिर पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने एएसआई की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि भोजशाला परिसर में शेर, हाथी, घोड़ा, कुत्ता, बंदर, सर्प, कछुआ और हंस सहित कई पशु-पक्षियों की आकृतियां भी पाई गई हैं। इसके साथ ही कीर्तिमुख और व्याल जैसी मिश्रित आकृतियों की नक्काशी भी चिन्हित की गई है, जो प्राचीन भारतीय स्थापत्य कला की विशिष्ट पहचान मानी जाती हैं।
यह सर्वे रिपोर्ट भोजशाला के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को लेकर चल रही बहस में एक अहम दस्तावेज के रूप में देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन निष्कर्षों से स्थल की प्राचीनता और उसके मूल स्वरूप को समझने में मदद मिलेगी।#Bhojshala #Dhar #ASIReport #MadhyaPradesh #Archaeology #IndianHistory #BreakingNews