देश में खेल जगत में डोपिंग का संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि स्टेडियमों के वॉशरूम में इस्तेमाल की गई सिरिंजें मिल रही हैं, कई एथलीट्स डोप टेस्ट में असफल हो रहे हैं और अब सामान्य दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन से भी प्रतिबंधित पदार्थ खिलाड़ियों के शरीर में पहुंचने का खतरा बढ़ गया है।
इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए National Medical Commission (NMC) ने देशभर के डॉक्टरों, अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं।
डोपिंग मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी
भारत में हाल के वर्षों में डोपिंग के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। कई खिलाड़ी प्रतिबंधित पदार्थों के सेवन के कारण प्रतियोगिताओं से बाहर हो रहे हैं, जिससे देश की खेल छवि पर भी असर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या केवल जानबूझकर डोपिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि कई बार अनजाने में ली गई दवाएं भी इसका कारण बन रही हैं।
NMC की एडवाइजरी, डॉक्टरों के लिए सख्त निर्देश
National Medical Commission ने हाल ही में एक सार्वजनिक नोटिस जारी करते हुए डॉक्टरों को निर्देश दिया है कि वे एथलीट्स का इलाज करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें।
डॉक्टरों को सलाह दी गई है कि वे दवाएं लिखने से पहले यह सुनिश्चित करें कि उनमें कोई प्रतिबंधित तत्व शामिल न हो, ताकि खिलाड़ियों के करियर पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
खेल मंत्रालय की चिंता के बाद कार्रवाई
यह कदम Ministry of Youth Affairs and Sports की चिंता के बाद उठाया गया है। मंत्रालय ने डोपिंग के बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए NMC को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने को कहा था।
मंत्रालय का मानना है कि अगर डॉक्टरों को सही जानकारी और जागरूकता दी जाए, तो अनजाने में होने वाले डोपिंग मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
WADA की सूची से परिचित होना जरूरी
डॉक्टरों को विशेष रूप से World Anti-Doping Agency (WADA) की प्रतिबंधित पदार्थों की सूची से परिचित रहने की सलाह दी गई है।
इस सूची में शामिल दवाएं और केमिकल्स खिलाड़ियों के लिए प्रतिबंधित हैं, और इनके सेवन से खिलाड़ी न केवल प्रतियोगिताओं से बाहर हो सकते हैं, बल्कि उन पर प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है।#DopingCrisis #NMC #WADA #SportsNews #IndiaSports #AntiDoping