सोनीपत रेलवे स्टेशन पर खुफिया कैमरा लगाए जाने का मामला सामने आया है। यह कैमरा 26 फरवरी को लगाया गया था और लगभग 18 दिनों तक सक्रिय रहा। गाजियाबाद पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की संयुक्त टीम भौवापुर निवासी आरोपी प्रवीन को लेकर बुधवार दोपहर करीब तीन बजे सोनीपत पहुंची। जांच के बाद टीम ने इस खुफिया कैमरे को उतार दिया।
गाजियाबाद में पकड़े गए हैं छह संदिग्ध
सूत्रों के अनुसार, इस सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग सीधे पाकिस्तानी हैंडलर के मोबाइल पर जा रही थी, जिसमें सोनीपत स्टेशन के सभी पांच प्लेटफॉर्मों की गतिविधियां कैद हो रही थीं। आरोपित प्रवीन को मंगलवार को सात दिन के रिमांड पर लिया गया है। जानकारी के मुताबिक, आरोपी प्रवीन ने दिल्ली कैंट रेलवे स्टेशन पर भी इसी तरह का खुफिया कैमरा लगाया था, जिसे आरपीएफ ने पहले ही हटा लिया था। यह मामला गाजियाबाद में हाल ही में पकड़े गए जासूसी नेटवर्क से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां पाकिस्तानी हैंडलर व्हाट्सएप के जरिए निर्देश देकर संवेदनशील स्थानों की लाइव फुटेज मंगवा रहे थे।अब तक कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं की
सोमवार को आरपीएफ ने रेलवे स्टेशन के पास ओएचई पोल (पोल नंबर 42/27 या आसपास) पर यह संदिग्ध कैमरा देखा। जासूसी की आशंका होने पर टीम ने तुरंत कैमरे पर कपड़ा बांध दिया ताकि रिकॉर्डिंग रुक जाए। इसके बाद दिल्ली से विशेषज्ञ टीम बुलाई गई लेकिन तीन दिन बीतने के बाद भी कोई टीम नहीं पहुंची और अब तक किसी के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई।
अधिकारियों ने साधी चुप्पी, चीख रहे सवाल
मौके पर जांच के दौरान सोनीपत आरपीएफ की टीम केवल कैमरे पर कपड़ा बांधने तक सीमित रही। जांच टीम में मौजूद अधिकारियों और विशेषज्ञों ने किसी भी सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया। अधिकारियों की यह चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है…
ऐसा करने के पीछे आरोपी की पूरी योजना क्या थी?
यह कैमरा कब और किसने लगाया?
यह सिम से संचालित होता है या वाईफाई से?
मेमोरी कार्ड लगा है या लाइव फुटेज ट्रांसमिट हो रही है?






