प्रखंड क्षेत्र की मंझौली पंचायत के मंझीगांवा गांव स्थित मां झालखंडी मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना माता रानी पूरी करती हैं। यही कारण है कि चैत माह में यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है।
झारखंड ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य बिहार, उत्तरप्रदेश सहित अन्य इलाकों से भी प्रतिदिन हजारों भक्त माता के दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। चैत माह में यहां उमड़ने वाली भीड़ इस बात की गवाही देती है कि क्षेत्र ही नहीं, आसपास के जिलों और राज्यों के लोगों के मन में भी माता के प्रति गहरी श्रद्धा है।चैत नवमी से शुरू होता है विशेष अनुष्ठान
मंदिर में चैत नवमी से विशेष धार्मिक अनुष्ठान शुरू होता है, जो चैत पूर्णिमा तक चलता है। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्ति, श्रद्धा और जयकारों से गूंज उठता है। सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं और दिनभर पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी रहता है।प्राचीनता और चमत्कारिक मान्यता से जुड़ी है पहचान
मां झालखंडी मंदिर की पहचान केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे आस्था केंद्र के रूप में है, जो अपनी प्राचीनता और चमत्कारिक मान्यताओं के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। स्थानीय लोगों के अनुसार माता की प्रतिमा किसी व्यक्ति द्वारा स्थापित नहीं की गई थी, बल्कि वह स्वयं भूमि से प्रकट हुई थी।
यही मान्यता इस मंदिर को विशेष बनाती है। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा जाता है कि यह ऐसा दुर्लभ मंदिर है, जहां माता की प्रतिमा की पारंपरिक प्राण-प्रतिष्ठा नहीं हुई, बल्कि वे स्वयं प्रकट हुईं।






