हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स सयुंक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत बजट को दिशाहीन, विकासहीन और पेंशनर्स विरोधी करार दिया है। प्रदेश के इतिहास में पहली बार बजट में 4000 करोड़ रुपये की कटौती की गई है, जो सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन का स्पष्ट प्रमाण है।
18 संगठनों ने बनाई रणनीति
संयुक्त संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर, महासचिव इंद्र पाल शर्मा, अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा और मीडिया प्रभारी सैन राम नेगी ने शिमला में जारी बयान में कहा कि समिति के 18 संगठनों के नेताओं ने निर्णय लिया है कि 30 मार्च को विधानसभा का घेराव किया जाएगा और धरना दिया जाएगा।करोड़ों रुपये की देनदारियां
उन्होंने कहा कि चौथे वर्ष के बजट में पहली जनवरी, 2016 से 31 जनवरी, 2022 के बीच सेवानिवृत्त कर्मचारियों की करोड़ों रुपये की देनदारियों का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। पेंशनरों को संशोधित ग्रैच्युटी, कम्युटेशन और छुट्टी नगदीकरण न देकर सरकार उनके साथ अन्याय कर रही है। जबकि जनवरी 2022 के बाद के पेंशनर्स को छठे वेतनमान के संशोधित वित्तीय लाभ दिए जा रहे हैं।
44 महीने के डीए पर लगी निराशा
समिति ने बजट में पेंशनरों और कर्मचारियों के 13 प्रतिशत महंगाई भत्ते न देने, 44 महीने के महंगाई भत्ते की बकाया राशि और लंबित चिकित्सा बिलों के भुगतान के लिए कोई प्रावधान न करने की कड़ी निंदा की है।
2016 से जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की बकाया राशि का जिक्र किया गया है, लेकिन वह कब देय होगी, यह स्पष्ट नहीं है।






