रूस-यूक्रेन युद्ध में लापता युवक का कंकाल घर पहुंचा, डेढ़ साल बाद परिवार को मिला अजहरुद्दीन का अंतिम निशान

शहर कोतवाली क्षेत्र के गुलामीपुर गांव में गुरुवार शाम उस समय भावुक माहौल बन गया, जब रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान लापता हुए युवक अजहरुद्दीन के अवशेष उसके पैतृक घर पहुंचाए गए। करीब डेढ़ वर्ष से अपने बेटे की तलाश में भटक रहे परिवार को अब उसकी पहचान होने के बाद कंकाल के रूप में अंतिम निशान मिला है।

जानकारी के अनुसार गुलामीपुर निवासी अजहरुद्दीन जनवरी 2024 में रोजगार की तलाश में रूस गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ व्यक्तियों ने उसे रूस में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी दिलाने का भरोसा देकर विदेश भेजा था। बेहतर भविष्य और रोजगार की उम्मीद में वह रूस पहुंच गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद हालात पूरी तरह बदल गए।

बताया जा रहा है कि रूस पहुंचने के बाद लगभग एक महीने तक उसे कोई निर्धारित कार्य नहीं सौंपा गया। इसी दौरान उसे सैन्य प्रशिक्षण दिया जाने लगा। जब अजहरुद्दीन ने प्रशिक्षण का कारण पूछा तो उसे बताया गया कि युद्ध जैसे हालात को देखते हुए उसकी सुरक्षा के लिए यह प्रशिक्षण जरूरी है।

परिवार के अनुसार बाद में उससे संपर्क कम होता गया और कुछ समय बाद उसके युद्ध क्षेत्र में लापता होने की सूचना मिली। इस खबर के बाद से परिवार लगातार उसकी सलामती की उम्मीद लगाए बैठा था। प्रशासनिक और राजनयिक स्तर पर भी उसकी जानकारी जुटाने के प्रयास किए गए, लेकिन लंबे समय तक कोई स्पष्ट सूचना नहीं मिल सकी।

हाल ही में संबंधित एजेंसियों द्वारा की गई पहचान प्रक्रिया के बाद यह पुष्टि हुई कि युद्ध के दौरान मिले मानव अवशेष अजहरुद्दीन के हैं। पहचान पूरी होने के बाद उसके अवशेष परिवार को सौंप दिए गए। गुरुवार को जैसे ही कंकाल उसके पैतृक आवास पहुंचा, परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

अजहरुद्दीन के स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों का कहना है कि वह रोजगार की तलाश में विदेश गया था, लेकिन उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि उसका अंत इस तरह होगा। गांव के लोगों ने भी परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

यह मामला एक बार फिर विदेशों में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं को दिए जाने वाले झूठे वादों और युद्धग्रस्त क्षेत्रों में भेजे जाने के जोखिमों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश में रोजगार के अवसर तलाशने वाले युवाओं को अधिक सतर्क रहने और केवल अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से ही विदेश जाने की प्रक्रिया अपनानी चाहिए।

फिलहाल परिवार अजहरुद्दीन के अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटा है और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल बना हुआ है।

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