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ओडिशा के रायगढ़ा जिले के गुणुपुर क्षेत्र के पूर्व विधायक राममूर्ति गमांगो का निधन हो गया। वह 76 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। राममूर्ति गमांगो लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से जुड़े रहे और विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ अपनी भूमिका निभाते हुए राज्य की राजनीति में पहचान बनाई।
राममूर्ति गमांगो ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जनता दल के साथ की थी। वर्ष 1990 में उन्होंने जनता दल के टिकट पर गुणुपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता और 1995 तक विधायक रहे। इसके बाद राज्य की राजनीति में हुए बदलावों के बीच उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा।
बीजद-भाजपा गठबंधन के दौर में वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की और 2005 तक विधायक पद पर रहे। अपने राजनीतिक सफर के दौरान उन्होंने कई बार राजनीतिक दल बदले और अंततः बीजू जनता दल (बीजद) में शामिल हो गए।
हालांकि उनका राजनीतिक जीवन कई विवादों से भी जुड़ा रहा। पत्नी हत्या मामले में भुवनेश्वर की एक विशेष अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। यह मामला लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा और उनकी राजनीतिक छवि पर भी इसका प्रभाव पड़ा।
बताया जा रहा है कि राममूर्ति गमांगो पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। वह उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) और मधुमेह (डायबिटीज) जैसी बीमारियों से पीड़ित थे। स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के बीच उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय नागरिकों ने शोक व्यक्त किया है। समर्थकों ने उन्हें एक अनुभवी जनप्रतिनिधि के रूप में याद किया, जिन्होंने कई वर्षों तक गुणुपुर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
राममूर्ति गमांगो के निधन के साथ ओडिशा की राजनीति का एक चर्चित अध्याय भी समाप्त हो गया। उनके राजनीतिक जीवन में उपलब्धियां और विवाद दोनों शामिल रहे, लेकिन क्षेत्रीय राजनीति में उनका नाम लंबे समय तक याद किया जाएगा।




