प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए कर्नाटक पुलिस ने एक अमेरिकी ईसाई मिशनरी संगठन ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ (TTI) और बेंगलुरु सहित देश के अन्य हिस्सों के छह लोगों के खिलाफ नक्सलवाद को बढ़ावा देने और धर्म परिवर्तन के लिए कथित तौर पर फंडिंग करने का आपराधिक मामला दर्ज किया है।
इन पर विदेशी डेबिट कार्डों के अवैध नेटवर्क के जरिए करीब 136 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी करने, देश में अवैध धर्मांतरण को बढ़ावा देने और छत्तीसगढ़ के बस्तर व धमतरी जैसे वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) प्रभावित इलाकों में फंडिंग करने का बेहद गंभीर आरोप है।ईडी ने दर्ज कराई थी शिकायत
ED ने यह शिकायत थानूर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी। पुलिस ने इस मामले में कड़े कानून यूएपीए (UAPA) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज किया है।ED की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ ने विदेशी डेबिट कार्ड के नेटवर्क का इस्तेमाल करके भारतीय वित्तीय नियमों और विदेशी योगदान कानूनों का उल्लंघन किया। पूरे भारत में 1,000 से ज्यादा विदेशी डेबिट कार्ड बांटे गए, जिनमें से कई कार्ड संतोष कुमार के नाम पर चल रहे थे।
जांच में करोड़ों के लेनदेन का खुलासा
जांच में सामने आया है कि नवंबर 2025 और अप्रैल 2026 के बीच इन ट्रांजैक्शन के जरिए करीब 92.5 करोड़ रुपये से 95 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ। जनवरी 2024 और मार्च 2026 के बीच इसी तरह के तरीकों का इस्तेमाल करके अतिरिक्त 44 करोड़ रुपये निकाले गए।
बस्तर और धमतरी में की जा रही थी फंडिग
TOI ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया कि शुरुआती सबूतों से पता चला है कि बड़ी मात्रा में नकद निकासी को छत्तीसगढ़ के बस्तर और धमतरी जिलों जैसे वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाकों में भेजा जा रहा था।
FIR में इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को नष्ट करने का भी जिक्र है, जिसमें खास तौर पर यह दावा किया गया है कि वित्तीय ट्रैकिंग को छिपाने के लिए एक आरोपी ने बैकएंड डेटाबेस अकाउंट डिलीट कर दिया था।
फिलहाल इस बात की जांच की जा रही है कि इन आदिवासी और संघर्ष-ग्रस्त इलाकों में कमजोर आबादी को निशाना बनाने वाले TTI के मल्टी-लेवल चर्च प्लांटिंग और धार्मिक आउटरीच मॉडल में इन फंड का इस्तेमाल कैसे किया गया।



