नौ महीने से मानदेय नहीं मिलने पर आंदोलन की राह पर रोजगार सेवक, आर्थिक संकट गहराया

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के कुदरहा ब्लॉक में कार्यरत ग्राम रोजगार सेवकों को पिछले नौ महीनों से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। लंबे समय से भुगतान लंबित रहने के कारण रोजगार सेवकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब नाराज कर्मचारियों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है।

ग्राम रोजगार सेवकों का कहना है कि वे लगातार विभिन्न सरकारी योजनाओं के संचालन और क्रियान्वयन में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर मानदेय नहीं मिल रहा है।

रोजगार सेवकों के अनुसार, वे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के कार्यों के साथ-साथ कई अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं और सर्वेक्षण कार्यों में भी योगदान दे रहे हैं।

उन्होंने बताया कि उनसे प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों की जियो टैगिंग, क्राफ्ट सर्वे, जलदूत सर्वे और अन्य विभागीय कार्य भी नियमित रूप से कराए जा रहे हैं। इसके बावजूद पिछले नौ महीनों से मानदेय का भुगतान लंबित पड़ा हुआ है।

रोजगार सेवकों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच बिना मानदेय के परिवार का भरण-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है। दैनिक जरूरतों और घरेलू खर्चों को पूरा करना भी उनके लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से जल्द से जल्द बकाया मानदेय जारी करने की मांग की है। रोजगार सेवकों का कहना है कि यदि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।

ग्राम रोजगार सेवकों का मानना है कि सरकारी योजनाओं को धरातल पर लागू करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए उनके मानदेय भुगतान में इस तरह की देरी से कार्य व्यवस्था और कर्मचारियों के मनोबल पर भी असर पड़ता है।

अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि प्रशासन और संबंधित विभाग रोजगार सेवकों की मांगों पर क्या फैसला लेते हैं और लंबित मानदेय भुगतान को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।

Leave a Comment

शहर चुनें