नई दिल्ली। केंद्र सरकार पिछले लगभग 12 वर्षों से कौशल विकास (Skill Development) को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। हालांकि अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के कारण कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय को समय-समय पर अपनी योजनाओं में बदलाव करना पड़ा है। इस बीच नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट ने राज्यों के बीच कौशल विकास और विदेश से आने वाले रेमिटेंस (विदेश में कार्यरत प्रवासियों द्वारा भेजी गई धनराशि) को लेकर महत्वपूर्ण तस्वीर पेश की है।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर भारत के राज्यों से रोजगार के लिए विदेश जाने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन देश में आने वाले कुल रेमिटेंस में उनकी हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम बनी हुई है।
कौशल की कमी बनी प्रमुख वजह
नीति आयोग का कहना है कि उत्तर भारत के बड़ी संख्या में युवा सीमित कौशल (Low Skill) के कारण विदेशों में अपेक्षाकृत कम वेतन वाली नौकरियों में कार्यरत हैं। इससे उनकी आय और अपने राज्यों को भेजे जाने वाले रेमिटेंस की मात्रा भी सीमित रहती है।
इसके विपरीत, दक्षिण भारत के कई राज्यों के युवा बेहतर तकनीकी और पेशेवर कौशल के साथ विदेशों में उच्च वेतन वाली नौकरियां प्राप्त कर रहे हैं। यही कारण है कि उन राज्यों की रेमिटेंस में हिस्सेदारी अधिक बनी हुई है।
राज्यों के लिए सीख
रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि यदि राज्य सरकारें स्थानीय स्तर पर कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित करें, तो विदेशों में बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। इससे न केवल युवाओं की आय बढ़ेगी, बल्कि संबंधित राज्यों की अर्थव्यवस्था को भी रेमिटेंस के रूप में अधिक लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल विदेश भेजने की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। युवाओं को उच्च गुणवत्ता वाले कौशल, भाषा दक्षता और पेशेवर प्रशिक्षण उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि वे वैश्विक श्रम बाजार में बेहतर वेतन वाली नौकरियां हासिल कर सकें और देश की अर्थव्यवस्था में अधिक योगदान दे सकें।#NITIAayog #SkillDevelopment #Remittance #Employment #IndianYouth #Economy #Policy #HindiNews