करोड़ों का DJ-बैंड बाजा कारोबार, लेकिन बिहार सरकार को नहीं मिलता टैक्स! आखिर कब होगी कार्रवाई?

 शादी-विवाह का मौसम शुरू होते ही बैंड-बाजा और डीजे कारोबार रफ्तार पकड़ लेता है। लोकप्रिय बैंड और डीजे संचालकों की बुकिंग महीनों पहले ही फुल हो जाती है। एक रात के कार्यक्रम के लिए हजारों से लेकर लाखों रुपये तक वसूले जाते हैं, लेकिन इस कारोबार का बड़ा हिस्सा सरकारी निगरानी से बाहर दिखाई देता है।

करोड़ों का कारोबार, टैक्स पर उठ रहे सवाल

बैंड, डीजे और साउंड सिस्टम का व्यवसाय अब करोड़ों रुपये के उद्योग का रूप ले चुका है। आधुनिक साउंड सिस्टम, एलईडी लाइट, जनरेटर और बड़ी टीम के साथ यह कारोबार तेजी से बढ़ रहा है।बैंड, डीजे और साउंड सिस्टम का व्यवसाय अब करोड़ों रुपये के उद्योग का रूप ले चुका है। आधुनिक साउंड सिस्टम, एलईडी लाइट, जनरेटर और बड़ी टीम के साथ यह कारोबार तेजी से बढ़ रहा है।अस्पतालों, स्कूलों और रिहायशी इलाकों में भी तेज आवाज से लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।

मैरिज हॉल पर सख्ती, DJ कारोबार अब भी दायरे से बाहर

हाल ही में जिला प्रशासन ने मैरिज हॉल, बैंक्वेट हॉल और गेस्ट हाउस संचालकों के लिए अग्निशमन, प्रदूषण नियंत्रण, खाद्य सुरक्षा, पार्किंग और विद्युत सुरक्षा समेत विभिन्न विभागों की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) अनिवार्य कर सख्ती शुरू की है। पुलिस ने भी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए हैं।

अब बैंड-बाजा कारोबार पर भी निगरानी की मांग

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब शादी समारोह का अहम हिस्सा बैंड-बाजा और डीजे कारोबार है, तो इसे प्रशासनिक निगरानी के दायरे में क्यों नहीं लाया जा रहा।

जानकारों का मानना है कि इस क्षेत्र का पंजीकरण, जीएसटी सत्यापन, ध्वनि प्रदूषण मानकों और यातायात नियमों की नियमित जांच से सरकार का राजस्व बढ़ सकता है और आम लोगों को भी राहत मिल सकती है।

सर्वे और सत्यापन की है जरूरत

विशेषज्ञों का कहना है कि जिले में बैंड-बाजा और डीजे संचालकों का व्यापक सर्वे, पंजीकरण और दस्तावेजों का सत्यापन समय की मांग है।

इससे कर चोरी पर रोक लगाने, कानून का पालन सुनिश्चित करने और शादी-विवाह के आयोजनों को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि मैरिज हॉल के बाद प्रशासन इस तेजी से बढ़ते कारोबार पर कब कार्रवाई करता है।

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