हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक दोषी को केवल 5 वर्ष 10 माह 18 दिन जेल में रहने के बाद रिहा किए जाने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गंभीर नाराजगी जताई है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि इतने गंभीर अपराध में दोषी को समयपूर्व रिहाई किस आधार और किन नियमों के तहत प्रदान की गई।
हाई कोर्ट ने इस मामले में राज्य के प्रमुख सचिव (गृह) को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया है। अदालत यह जानना चाहती है कि दोषी की रिहाई के लिए किन मानदंडों और प्रक्रिया का पालन किया गया।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भानोत और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की खंडपीठ ने कानपुर निवासी शैलेंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता वशिष्ठ नारायण त्रिपाठी ने अदालत को बताया कि हत्या के मुख्य अभियुक्त जय देव सिंह को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 और 148 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बावजूद उसे करीब 5 वर्ष 10 माह 18 दिन जेल में रहने के बाद ही समयपूर्व रिहा कर दिया गया, जिस पर याचिकाकर्ता ने आपत्ति जताई है।#AllahabadHighCourt #HighCourt #UPGovernment #MurderCase #LifeImprisonment #CourtNews #Kanpur #Judiciary #LegalNews #CrimeNews