भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़े श्रीराम वन गमन मार्ग के निर्माण को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अहम आदेश दिया है। अदालत ने इस मामले में दाखिल PIL का निस्तारण करते हुए याचिकाकर्ता को लोक निर्माण विभाग (PWD) के समक्ष अपनी मांगों को लेकर प्रत्यावेदन देने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने अरविंद कुमार सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि संबंधित अधिकारी कानून के दायरे में सभी तथ्यों पर विचार कर उचित निर्णय लें।
याचिका में मांग की गई थी कि राज्य सरकार को वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस, लोक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं में बताए गए मार्ग के आधार पर वास्तविक श्रीराम वन गमन मार्ग का निर्माण कराने का निर्देश दिया जाए। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की थी कि रामायण सर्किट के लिए उपलब्ध धनराशि का उपयोग इसी मार्ग के विकास में किया जाए।
याचिका में राष्ट्रीय राजमार्ग-731ए को श्रीराम वन गमन मार्ग घोषित किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा विकसित किया जा रहा यह मार्ग धार्मिक ग्रंथों में वर्णित भगवान श्रीराम के वन गमन पथ से अलग है।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी मांगों से संबंधित विस्तृत प्रत्यावेदन लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता या राष्ट्रीय राजमार्ग प्रभाग के प्रभारी अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें। इसके बाद अधिकारी सभी तथ्यों और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए मामले पर निर्णय लें।
कोर्ट के इस आदेश के बाद अब श्रीराम वन गमन मार्ग के निर्माण को लेकर आगे की प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ेगी। इस मामले पर धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन दृष्टि से भी लोगों की नजर बनी हुई है।#ShriRamVanGamanMarg #RamVanGamanMarg #AllahabadHighCourt #LucknowBench #LordRam #Ramayan #Ayodhya #UPNews #CourtNews #PIL #LegalNews #BreakingNews #LatestNews #HindiNews #RamCircuit #RamayanaCircuit #UttarPradeshNews #IndiaNews #NewsUpdate #SanatanDharma



