पृथ्वी पर बढ़ता प्लास्टिक प्रदूषण अब एक गंभीर वैश्विक पर्यावरणीय संकट बन चुका है। प्लास्टिक के छोटे-छोटे कण यानी माइक्रोप्लास्टिक अब महासागरों के उन हिस्सों तक भी पहुंच चुके हैं, जहां अभी तक इंसान की पहुंच नहीं हो पाई है।
एक अध्ययन के अनुसार, हर साल करीब 11 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा महासागरों में पहुंच जाता है। समय के साथ यह प्लास्टिक छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटकर माइक्रोप्लास्टिक में बदल जाता है और समुद्री धाराओं के माध्यम से पूरे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में फैल जाता है।
माइक्रोप्लास्टिक का यह बढ़ता प्रसार समुद्री जीवों के लिए बड़ा खतरा बन रहा है। मछलियों और अन्य समुद्री जीवों के शरीर में पहुंचने वाले ये कण खाद्य श्रृंखला के जरिए इंसानों तक भी पहुंच सकते हैं, जिससे मानव स्वास्थ्य पर संभावित खतरे की चिंता बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन, सिंगल यूज प्लास्टिक के कम इस्तेमाल और पर्यावरण संरक्षण के प्रभावी उपायों के बिना इस समस्या को नियंत्रित करना मुश्किल होगा। महासागरों को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाने के लिए वैश्विक स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।




