केरल के उपभोक्ता आयोग ने कतर एयरवेज को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी ठहराते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने एयरलाइन को एक परिवार के दो बच्चों को, जिनमें 10 महीने का स्तनपान करने वाला शिशु भी शामिल था, बोर्डिंग पास जारी होने के बावजूद उड़ान में यात्रा करने से रोकने के मामले में 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
एर्नाकुलम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने 14 जुलाई को दिए अपने आदेश में कतर एयरवेज को पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा और 25 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में भुगतान करने का निर्देश दिया।
क्या है पूरा मामला?
आयोग के आदेश के अनुसार, यह शिकायत इटली में कार्यरत भारतीय प्रवासी रोशन जोस ने दर्ज कराई थी। रोशन जोस अपनी पत्नी विनाया और दो बच्चों के साथ नवंबर 2018 में छुट्टियां मनाने के लिए वेनिस से कोच्चि आए थे।
शिकायत में कहा गया कि वापसी यात्रा के दौरान कतर एयरवेज ने परिवार के सभी यात्रा दस्तावेजों की जांच की और 10 महीने के शिशु समेत सभी सदस्यों के लिए रिटर्न टिकट और बोर्डिंग पास जारी कर दिए। इसके बावजूद बाद में दोनों बच्चों को विमान में सवार होने से रोक दिया गया, जिसके चलते परिवार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
उपभोक्ता आयोग ने इस मामले को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए एयरलाइन को मुआवजा देने का निर्देश दिया।#QatarAirways #ConsumerCourt #KeralaNews #AirTravel #LegalNews #PassengerRights







