केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी है कि जनवरी 2019 से जून 2026 के बीच देशभर में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान 498 सफाई कर्मियों की मौत हुई है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के प्रश्न के लिखित उत्तर में यह आंकड़े प्रस्तुत किए।
सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि इन मौतों में से किसी को भी मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से मैला ढोने) के कारण हुई मौत के रूप में दर्ज नहीं किया गया है। सरकार के अनुसार, ये सभी मामले खतरनाक सफाई (Hazardous Cleaning) की श्रेणी में आते हैं।
सालवार मौतों का आंकड़ा
- 2019: 132 मौतें (सबसे अधिक)
- 2020: 34 मौतें
- 2021: 62 मौतें
- 2022: 88 मौतें
- 2023: 65 मौतें
- 2024: 54 मौतें
- 2025: 47 मौतें
- 2026 (जनवरी-जून): 16 मौतें
कुल मौतें: 498
सरकार ने अपने जवाब में मैनुअल स्कैवेंजिंग और खतरनाक सफाई के बीच अंतर भी स्पष्ट किया। सरकार के अनुसार, मैनुअल स्कैवेंजिंग का अर्थ अस्वच्छ शौचालयों, खुली नालियों, गड्ढों या रेलवे ट्रैक से मानव मल को हाथों से हटाने की प्रक्रिया है।
वहीं, सीवर या सेप्टिक टैंक की बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के सफाई को ‘खतरनाक सफाई’ (Hazardous Cleaning) माना जाता है। इसी वजह से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान हुई इन 498 मौतों को मैनुअल स्कैवेंजिंग नहीं, बल्कि खतरनाक सफाई की श्रेणी में दर्ज किया गया है।