मिट्टी की उर्वरता पर रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से पड़ रहे नकारात्मक प्रभाव को कम करने और कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) ने बीजामृत नामक एक प्रभावी बायो-फर्टिलाइज़र विकसित किया है। इसके उपयोग से न केवल बोए गए बीजों की गुणवत्ता में सुधार होता है, बल्कि रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता भी घटती है।
कृषि विज्ञान केंद्र के अनुसार, बीजामृत के प्रयोग से बीजों का अंकुरण बेहतर होता है और फसलों की शुरुआती वृद्धि मजबूत होती है। यही कारण है कि वर्तमान में क्षेत्र के हजारों किसान बीजामृत बनाने और उसके प्रयोग की तकनीक सीख रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय से रासायनिक खादों के लगातार इस्तेमाल के कारण मिट्टी की प्राकृतिक गुणवत्ता कमजोर हुई है, जिसका सीधा असर फसलों के पोषण मूल्य और मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ा है। कृषि विभाग की वार्षिक रिपोर्ट में भी मिट्टी में आवश्यक पोषक तत्वों की लगातार कमी को लेकर चेतावनी दी जाती रही है।
इन्हीं चिंताओं को देखते हुए सरकार और प्रशासन अब ऑर्गेनिक खादों और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दे रहे हैं। बीजामृत जैसे बायो-फर्टिलाइज़र इस दिशा में किसानों के लिए एक प्रभावी और टिकाऊ विकल्प साबित हो रहे हैं।#बीजामृत #जैविकखेती #बायोफर्टिलाइज़र #मिट्टीकीउर्वरता #कृषिविज्ञानकेंद्र #ऑर्गेनिकफार्मिंग