सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत ‘आतंकी कृत्य’ केवल उस कृत्य तक सीमित नहीं है जिसे सीधे अंजाम दिया गया हो। इसमें वे लोग भी शामिल होते हैं जो योजना, समन्वय, लामबंदी या किसी अन्य तरह की मिलीभगत के माध्यम से ऐसे कृत्यों को अंजाम देने में योगदान देते हैं।
यूएपीए की धारा-15 के अनुसार, आतंकी कृत्य वह है जो भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा या संप्रभुता को खतरा पहुंचाने, या भारतीय नागरिकों या किसी विशेष समूह में आतंक फैलाने के इरादे से किया गया हो।
इस प्रविधान में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आतंक फैलाना बम, डाइनामाइट, विस्फोटक या ज्वलनशील पदार्थ, आग्नेयास्त्र या किसी अन्य माध्यम के उपयोग से हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस परिप्रेक्ष्य में कहा कि कानून केवल कृत्य को ही नहीं, बल्कि उसकी योजना और सहयोगी गतिविधियों को भी अपराध की श्रेणी में रखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस व्याख्यान से यूएपीए के तहत सजग निगरानी और आरोप तय करने की प्रक्रिया और स्पष्ट हुई है, जिससे आतंकवाद और उसके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई और प्रभावी होगी।#SupremeCourt #UAPA #TerroristAct #IndianLaw #NationalSecurity #Section15UAPA #Terrorism #LegalInterpretation #CounterTerrorism #BreakingNews