पाकिस्तान–सऊदी सैन्य समझौते से इस्लामी नाटो की राह, तुर्किये भी नेतृत्व की दौड़ में

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हाल ही में हुआ सैन्य समझौता क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरण गढ़ता दिख रहा है। इस समझौते के तहत यदि किसी एक देश पर बाहरी हमला होता है तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह प्रावधान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करता है।

इसी बीच तुर्किये लंबे समय से इस्लामी देशों का नेतृत्व करने की महत्वाकांक्षा रखता है। ऐसे में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये की साझेदारी भविष्य में एक इस्लामी नाटो जैसी संरचना का आधार बन सकती है, जिसमें इन तीनों देशों के साझा हित शामिल होंगे।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का ध्यान ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ एजेंडे पर केंद्रित है। वहीं अमेरिका से घटते भरोसे के बीच सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये अपने सामरिक सहयोग को बढ़ाकर एक वैकल्पिक शक्ति केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

इस समझौते से सऊदी अरब को एक परमाणु हथियार संपन्न देश का साथ मिला है, जबकि पाकिस्तान को संसाधनों से समृद्ध सऊदी अरब से आर्थिक सहयोग की उम्मीद है। भारत–पाकिस्तान संघर्ष की स्थिति में सऊदी अरब का सीधा सैन्य हस्तक्षेप भले ही संभव न हो, लेकिन पाकिस्तान को आर्थिक मदद मिलना तय माना जा रहा है।

यह गठजोड़ आने वाले समय में पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया की सुरक्षा और राजनीतिक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित कर सकता है।

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Khushi Kumari
Author: Khushi Kumari

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