झारखंड के जमशेदपुर के चर्चित उद्योगपति पुत्र कैरव गांधी की हजारीबाग के बरही से सकुशल बरामदगी के बाद इस हाई-प्रोफाइल अपहरण मामले की परतें खुलने लगी हैं। जांच में सामने आए तथ्य किसी थ्रिलर फिल्म की कहानी जैसे प्रतीत हो रहे हैं।
📌 पुलिस को गुमराह करने की चाल
- अपहरणकर्ताओं ने पुलिस को भ्रमित करने के लिए गाड़ी पर ‘पुलिस’ का स्टीकर लगाया।
- इंटरनेट आधारित वर्चुअल नंबरों का इस्तेमाल कर फिरौती की मांग की गई।
- कई बार गाड़ियां बदलकर अपराधियों ने पुलिस को चकमा देने की कोशिश की।
📌 ‘हनी-ट्रैप’ का शक
- 13 जनवरी की सुबह कैरव गांधी अचानक फैक्ट्री न जाकर घर लौटे और फिर बिना सुरक्षा बाहर निकले।
- सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि घर से महज 500 मीटर दूर वे बिना किसी प्रतिरोध के सफेद स्कॉर्पियो में बैठ गए।
- पुलिस को संदेह है कि किसी महिला या परिचित ने उन्हें मिलने के बहाने बुलाया।
- अब पुलिस उनके सोशल मीडिया चैट्स और मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) खंगाल रही है।
📌 टोल प्लाजा और गाड़ियों का खेल
- अपराधियों ने सफेद स्कॉर्पियो पर ‘पुलिस’ स्टीकर लगाकर चांडिल, बुंडू और पुरुलिया (बंगाल) के टोल प्लाजा पार किए।
- बिहार के वैशाली से बरामद हैचबैक कार से पता चला कि अपहरण से पहले कई दिनों तक रेकी की गई थी।
📌 तकनीकी जांच और ATS की भूमिका
- फिरौती मांगने के लिए अपराधियों ने इंडोनेशियाई कोड (+62) वाले इंटरनेट वर्चुअल नंबर का इस्तेमाल किया।
- उन्हें लगा कि यह ट्रेस नहीं होगा, लेकिन झारखंड पुलिस और ATS की तकनीकी सेल ने VoIP डंप डेटा का विश्लेषण किया।
- इसी सुराग के आधार पर पुलिस हजारीबाग के बरही तक पहुंची और दबाव में आकर अपराधियों ने कैरव को छोड़ दिया।
📌 गिरोह पर शक
- पुलिस को संदेह है कि इस अपहरण के पीछे कुख्यात चंदन सोनार गिरोह या अरविंद सिंह गिरोह का हाथ हो सकता है।
- ये गिरोह पहले भी झारखंड और बिहार में हाई-प्रोफाइल अपहरणों को अंजाम दे चुके हैं।
#KairavGandhiKidnapping #JharkhandNews #HighProfileCase #ATS #CrimeInvestigation