प्लास्टिक के अनियंत्रित उपयोग को रोकने में देरी करने पर आने वाले वर्षों में इसके गंभीर और दूरगामी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। द लांसेट द्वारा प्रकाशित नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि विश्व की प्लास्टिक प्रणाली से उत्पन्न होने वाले उत्सर्जन—जिनमें ग्रीनहाउस गैसें, वायु प्रदूषक कण और उत्पादन से निकलने वाले विषैले रसायन शामिल हैं—के कारण मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव 2016 की तुलना में 2040 तक दोगुने से भी अधिक हो सकते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य पर प्लास्टिक के जीवनचक्र से होने वाले प्रभाव में योगदान इस प्रकार है:
- 40 प्रतिशत: ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और उससे जुड़ी वैश्विक तापवृद्धि
- 32 प्रतिशत: प्लास्टिक उत्पादन प्रक्रियाओं से होने वाला वायु प्रदूषण
- 27 प्रतिशत: प्लास्टिक के जीवन चक्र के दौरान पर्यावरण में छोड़े गए जहरीले रसायन
- 1 प्रतिशत से कम: पानी की उपलब्धता में कमी, ओजोन परत पर प्रभाव और आयनीकरण विकिरण में वृद्धि
लंदन स्कूल ऑफ़ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन की शोधकर्ता मेगन डीनी ने बताया कि अध्ययन में पाया गया है कि प्लास्टिक के उत्पादन और खुले में जलाने से निकलने वाले उत्सर्जन से वैश्विक तापमान बढ़ता है, वायु प्रदूषण बढ़ता है और विषाक्तता के कारण कैंसर व गैर-संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ता है। उन्होंने कहा कि इनमें सबसे अधिक नुकसान प्राथमिक प्लास्टिक उत्पादन और खुले में जलाने से होता है।
रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि प्लास्टिक के उत्पादन, उपयोग और निपटान को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दशकों में मानव स्वास्थ्य पर और अधिक गंभीर बोझ बढ़ सकता है।PlasticPollution
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