उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-119) की स्थिति दोनों राज्यों में अलग-अलग है। जहां उत्तर प्रदेश में यह सड़क पूरी तरह दुरुस्त और चमकदार है, वहीं बिहार में इसका हाल बेहद खराब है। ग्रामीणों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक ने कई बार आवाज उठाई, लेकिन वन विभाग की अड़चन के कारण सड़क निर्माण अब तक अधर में लटका हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह सड़क पूरी तरह बन जाती है तो उत्तर प्रदेश के सोनभद्र और मिर्जापुर जिलों के साथ-साथ झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा। इससे दूरी कम होगी, समय की बचत होगी और ईंधन की खपत भी घटेगी।
11 किलोमीटर सड़क निर्माण अधर में
यदुनाथपुर से बेलदरिया और जारादाग होते हुए उत्तर प्रदेश की सीमा तक लगभग 11 किलोमीटर सड़क अब तक नहीं बन पाई है। इस अधूरी सड़क का खामियाजा आसपास के आधा दर्जन गांवों—यदुनाथपुर, सूअरमनवा, नेवरिया, सख्वा, बेलदरिया और जारादाग—के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
इन गांवों के निवासियों को आज भी प्रखंड मुख्यालय नौहट्टा और यदुनाथपुर थाना तक पहुंचने के लिए तीन से छह किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण पूरा होने से उनकी दैनिक आवाजाही और जीवनयापन में बड़ी राहत मिलेगी।
जनप्रतिनिधियों की मांग
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कई बार सरकार और प्रशासन से इस सड़क को पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वन विभाग की अनुमति मिलने के बाद ही निर्माण कार्य आगे बढ़ पाएगा। फिलहाल ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही इस समस्या का समाधान होगा और एनएच-119 का अधूरा हिस्सा भी बनकर तैयार होगा।
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