वासंती मौसम के आगमन के साथ ही प्रकृति रंगों से सराबोर हो उठती है और इसी माहौल में देश-विदेश की कला, संस्कृति और परंपराओं का सबसे बड़ा उत्सव शुरू हो रहा है। सूरजकुंड में आयोजित होने वाला विश्व-प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला 31 जनवरी (शनिवार) से प्रारंभ होकर 15 फरवरी तक चलेगा।
मेले का विस्तार
दक्षिण दिल्ली से सटे सूरजकुंड मेला प्रांगण लगभग 45 एकड़ क्षेत्र में फैला है। इस बार मेले में भारत सहित विभिन्न देशों से आए 1200 से अधिक शिल्पी और कलाकार अपने हुनर का प्रदर्शन करेंगे।
आकर्षण
मेले में एक से बढ़कर एक हस्तशिल्प, लोक कलाएं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू आगंतुकों को अपनी ओर खींचेगी। यह आयोजन न केवल कला और संस्कृति का उत्सव है, बल्कि विभिन्न परंपराओं और जीवनशैली का संगम भी है।
महत्व
सूरजकुंड मेला हर वर्ष कला प्रेमियों, पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनता है। यह आयोजन न केवल शिल्पकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करता है, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने का भी माध्यम है।
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