क्षय रोग (टीबी) को केवल फेफड़ों तक सीमित बीमारी मानना एक गंभीर भूल हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार यह रोग महिलाओं के गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब और संपूर्ण प्रजनन तंत्र को गहराई से प्रभावित करता है, जिससे बांझपन जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं में टीबी का खतरा अधिक रहता है। यदि समय रहते बीमारी की पहचान और उपचार न हो, तो यह न केवल मां बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है। जच्चा-बच्चा दोनों के स्वास्थ्य पर इसका सीधा असर पड़ता है।
प्रखंड क्षेत्र में टीबी से पीड़ित महिलाओं की संख्या चिंताजनक बनी हुई है, हालांकि हाल के वर्षों में मामलों में आंशिक कमी जरूर दर्ज की गई है। वर्ष 2024 में कुल 836 संदिग्ध मरीजों की जांच की गई, जिनमें 196 में टीबी की पुष्टि हुई थी। वहीं वर्ष 2025 में 666 लोगों की जांच के दौरान 183 मरीज गंभीर रूप से टीबी से ग्रसित पाए गए।
एसटीएलएस भूतेश कुमार तांती और यक्ष्मा पर्यवेक्षक संजय कुमार के अनुसार माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया से होने वाली टीबी महिलाओं में बांझपन का एक प्रमुख कारण बनती जा रही है। उनका कहना है कि गर्भावस्था के दौरान यदि टीबी का समय पर पता चल जाए और सही इलाज शुरू कर दिया जाए, तो गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने महिलाओं से अपील की है कि टीबी के शुरुआती लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें और किसी भी प्रकार की शंका होने पर तुरंत जांच कराएं।
लक्षणों को न करें नजरअंदाज:
यदि एक सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी, तेज बुखार, भूख न लगना, अत्यधिक थकान, तेजी से वजन कम होना, बलगम में खून आना या गर्दन की ग्रंथियों में सूजन दिखाई दे, तो तत्काल टीबी की जांच कराना आवश्यक है।Tuberculosis
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